उत्तराखण्ड
उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन मॉडल बना मिसाल, हिमाचल करेगा अपनाने की तैयारी।

संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के तकनीक-आधारित मॉडल ने अब दूसरे राज्यों का भी ध्यान खींचा है। हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जगत सिंह नेगी ने गुरुवार को यूएसडीएमए का दौरा कर यहां की व्यवस्थाओं को करीब से समझा और इसे अपने राज्य में लागू करने की बात कही।
मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों में भूस्खलन, अतिवृष्टि और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियां समान हैं। ऐसे में साझा रणनीति और बेहतर समन्वय से आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
दौरे के दौरान उन्होंने चारधाम यात्रा की मॉनिटरिंग प्रणाली का अवलोकन किया। केदारनाथ धाम यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम अलर्ट, भीड़ नियंत्रण, मौसम और मार्ग की सतत निगरानी तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच त्वरित समन्वय की व्यवस्था को उन्होंने बेहद प्रभावी बताया।
उन्होंने कहा कि इसी तरह की तकनीक-आधारित प्रणाली को हिमाचल में कैलाश मणिमहेश, किन्नर कैलाश और श्रीखंड महादेव यात्राओं के दौरान लागू किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया और मजबूत होगी।
यूएसडीएमए के सचिव विनोद कुमार सुमन ने प्राधिकरण के नवाचारों की जानकारी देते हुए बताया कि आधुनिक तकनीक और मजबूत तंत्र के जरिए राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है।
मंत्री ने तहसील स्तर पर गठित क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की सराहना करते हुए इसे आपदा के शुरुआती चरण में राहत कार्यों के लिए अहम बताया। साथ ही यूएसडीएमए के ‘भूदेव’ ऐप और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) को भी सराहा।
उन्होंने जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की तकनीकों का व्यापक उपयोग कर दोनों राज्यों के बीच अंतरराज्यीय समन्वय को और मजबूत किया जाएगा, जिससे आपदा के समय त्वरित सूचना साझा कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।




