उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में बढ़ता मानव–वन्यजीव संघर्ष: बाघ के हमले बने जानलेवा, 19 दिनों में छह मौतों से दहशत।

संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखंड में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। भालू के हमलों के बाद अब बाघों के हमलों में भी तेजी आई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। जनवरी माह में अब तक वन्यजीवों के हमलों में छह लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से चार की मौत बाघ के हमलों में हुई है।
पिछले वर्ष मानव–वन्यजीव संघर्ष में 68 लोगों की जान गई थी, जबकि 488 लोग घायल हुए थे। इस दौरान पशुओं, फसलों और मानव संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा। भालू के हमले उस समय भी सामने आते रहे जब तापमान गिरने के बाद उनके हाइबरनेशन में जाने की उम्मीद जताई जा रही थी।
इस माह बाघों के हमलों की घटनाएं कालागढ़ टाइगर रिजर्व, रामनगर और तराई पूर्वी वन प्रभाग क्षेत्रों में दर्ज की गईं, जहां लोगों की जान गई। वहीं, तेंदुओं के हमलों में भी दो लोगों की मौत हुई—एक नैनीताल वन प्रभाग में महिला और दूसरी पौड़ी जिले के बाड़ा गांव में एक व्यक्ति की।
वन विभाग के अनुसार, यह समय बाघों के प्रजनन का है। प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने लोगों से जंगल में जाने से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि अत्यंत आवश्यक हो तो समूह में जाएं, आवाज करते रहें और सुरक्षा के सभी उपाय अपनाएं। वन विभाग द्वारा लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ सुरक्षात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं।




