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भारत–जर्मनी वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग को नई मजबूती,संयुक्त आशय घोषणा पर हस्ताक्षर में आईआईटी रुड़की की अहम भूमिका।

उत्तराखण्ड

भारत–जर्मनी वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग को नई मजबूती,संयुक्त आशय घोषणा पर हस्ताक्षर में आईआईटी रुड़की की अहम भूमिका।

संवादसूत्र देहरादून 10 जनवरी 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने उत्तराखंड राज्य सरकार और जर्मनी के ब्रांडेनबुर्ग राज्य सरकार के बीच संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent – JDI) पर हस्ताक्षर के अवसर पर एक प्रमुख पहलकर्ता, सुगमकर्ता एवं शैक्षणिक साझेदार की भूमिका निभाई। यह घोषणा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में संरचित राज्य-स्तरीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह संयुक्त आशय घोषणा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, नवाचार और कौशल विकास को सुदृढ़ करने की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है तथा उच्च शिक्षा और अनुसंधान में वैश्विक सहभागिता के प्रति उत्तराखंड सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है। आईआईटी रुड़की और यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम के समन्वय से यह पहल संयुक्त अनुसंधान, नवाचार, नीति संवाद और शैक्षणिक सहभागिता के माध्यम से दीर्घकालिक क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक सुदृढ़ रूपरेखा प्रस्तुत करती है।
संयुक्त आशय घोषणा के अंतर्गत बहुआयामी सहयोग की परिकल्पना की गई है, जिसमें संयुक्त सूचना एवं कौशल केंद्र की स्थापना, भारत-जर्मनी स्टार्ट-अप्स पर केंद्रित उद्योग संपर्क कार्यालय का सृजन, संयुक्त डिग्री पहलों सहित राज्य-स्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रमों का विकास, चिन्हित प्राथमिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं तथा दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक एवं पारंपरिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना शामिल है।
यह सहयोग आपसी महत्व के प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा, जिनमें आपदा लचीलापन एवं प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां, कृषि, जलवायु और पर्यावरण निगरानी हेतु ड्रोन एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियां, स्वच्छ ऊर्जा एवं हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था, नवीन सामग्री और उन्नत विनिर्माण, तथा ई-गवर्नेंस, स्वास्थ्य सेवा और साइबर सुरक्षा में डेटा विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग शामिल हैं।
इस सहयोग के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु दोनों सरकारों, आईआईटी रुड़की, यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम एवं अन्य संबंधित हितधारकों के प्रतिनिधियों से युक्त एक संयुक्त कार्य बल (Joint Task Force) का गठन किया जाएगा, जो प्राथमिक पहलों की पहचान करेगा, सहयोग हेतु रोडमैप तैयार करेगा तथा भविष्य में एक व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) का प्रस्ताव रखेगा।
हस्ताक्षर समारोह में आईआईटी रुड़की के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व निदेशक प्रो. के. के. पंत ने किया। उत्तराखंड सरकार, जर्मनी के ब्रांडेनबुर्ग राज्य तथा यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
ब्रांडेनबुर्ग राज्य की विज्ञान, अनुसंधान एवं सांस्कृतिक मामलों की मंत्री डॉ. मान्या शुले ने कहा कि यह संयुक्त आशय घोषणा विज्ञान, अनुसंधान और उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो दीर्घकालिक एवं सतत साझेदारियों को प्रोत्साहित करेगी।
उत्तराखंड के तकनीकी शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि यह समझौता शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने की राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा इससे कौशल विकास, स्टार्ट-अप सहभागिता और मानव संसाधन सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने इसे उत्तराखंड और ब्रांडेनबुर्ग के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप नवाचार-आधारित सतत विकास में योगदान देगी।
यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम के अध्यक्ष प्रो. ओलिवर ग्यूंथर ने कहा कि यह संयुक्त आशय घोषणा उत्तराखंड और ब्रांडेनबुर्ग के बीच शैक्षणिक सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक प्रतिष्ठा वाली संस्थाओं के रूप में, आईआईटी रुड़की और यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम इस संयुक्त आशय घोषणा के कार्यान्वयन में शैक्षणिक एवं समन्वयक साझेदार के रूप में सक्रिय सहयोग प्रदान करेंगे।

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