उत्तराखण्ड
जल गुणवत्ता परीक्षण और रिपोर्टिंग सुदृढ़ करने के निर्देश।

संवादसूत्र देहरादून: मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन से संबंधित सर्वोच्च समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य में मिशन की प्रगति, वित्तीय स्थिति और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पेयजल की गुणवत्ता जांच में रासायनिक तथा बैक्टीरियोलॉजिकल दोनों प्रकार के परीक्षण अनिवार्य रूप से किए जाएं। साथ ही, संबंधित पेयजल स्रोतों के परीक्षण की जानकारी तिथि सहित परियोजनाओं में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट अंकित की जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
बैठक में GIS मैपिंग, पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर पाइपलाइन नेटवर्क अपलोड की प्रगति, सुजल गांव आईडी निर्माण, वित्तीय समन्वय और तकनीकी निरीक्षण की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इन सभी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना, सामाजिक अंकेक्षण और तृतीय-पक्ष निरीक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को इन विषयों पर अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार से संबंधित सभी बिंदुओं पर समयबद्ध रिपोर्टिंग तैयार कर प्रस्तुत करने को भी कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर घर जल योजना के तहत जिन गांवों में फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) की प्रगति दर्शाई गई है, उनका शत-प्रतिशत प्रमाणन भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि रिपोर्टिंग और वास्तविक क्रियान्वयन में कोई अंतर न रहे।
बैठक में सचिव दिलीप जावलकर और रणवीर सिंह, हॉफ वन विभाग रंजन मिश्र, अपर सचिव रोहित मीणा, अपूर्वा पांडेय सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, भारत सरकार के निदेशक प्रदीप सिंह वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।




