उत्तराखण्ड
राज्यभर में मॉक ड्रिल: गोल्डन आवर में त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतरीन समन्वय की परीक्षा।

संवादसूत्र देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल के प्रथम चरण में मंगलवार को बागेश्वर, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और नैनीताल में बहु-स्थलीय मॉक अभ्यास आयोजित किए गए। इन अभ्यासों में संभावित आपदा स्थितियों के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों की उपलब्धता, विभागीय समन्वय और राहत-बचाव तंत्र की तैयारियों को परखा गया।
यह पहला अवसर रहा जब जनपदों ने स्वयं अपने स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की, जबकि यूएसडीएमए द्वारा केवल मॉनिटरिंग की गई। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से सभी गतिविधियों की लगातार निगरानी की गई।
मॉक ड्रिल के दौरान भूकम्प, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना, बाढ़, वनाग्नि और अन्य आपात स्थितियों के परिदृश्यों पर अभ्यास किया गया। पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, स्वास्थ्य, विद्युत और राजस्व विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों ने समन्वित तरीके से रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार और राहत वितरण का प्रदर्शन किया।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि ऐसे अभ्यास वास्तविक आपदा के समय “गोल्डन आवर” में त्वरित और संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की क्षमता को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि इनसे कमियों की पहचान कर समय रहते सुधार संभव होता है, जिससे जन-धन की हानि को कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) महावीर सिंह चौहान, वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी तथा उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक शांतनु सरकार सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
जनपदों में ऐसा रहा अभ्यास
बागेश्वर:
भूकम्प, भूस्खलन, आग और वन्यजीव हमले के परिदृश्यों पर प्रभावी रेस्क्यू किया गया। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग करते हुए सुधार के निर्देश दिए।
रुद्रप्रयाग:
भूकम्प, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना और वनाग्नि पर समग्र अभ्यास किया गया। विभिन्न स्थानों पर त्वरित राहत-बचाव और संसाधनों के उपयोग की क्षमता परखी गई।
पौड़ी:
बाढ़, भूस्खलन, बस दुर्घटना और वनाग्नि के जटिल परिदृश्यों में रेस्क्यू का प्रदर्शन किया गया। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के निर्देशन में सभी एजेंसियों ने प्रभावी समन्वय दिखाया।
उत्तरकाशी:
बांध रिसाव, सुरंग धंसने, वाहन दुर्घटना और भूस्खलन जैसे परिदृश्यों पर अभ्यास किया गया। सिलक्यारा टनल में विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन किया गया।
नैनीताल:
भूस्खलन, बाढ़, बाघ हमले, भगदड़ और नाव पलटने जैसी घटनाओं पर मॉक ड्रिल हुई। रेस्क्यू, भीड़ नियंत्रण और राहत कार्यों का सटीक समन्वय देखने को मिला।
इस राज्यव्यापी मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा के समय प्रशासनिक तत्परता, विभागीय समन्वय, संचार तंत्र की मजबूती और फील्ड स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना रहा, ताकि वास्तविक आपदा के समय किसी प्रकार की देरी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।




