उत्तराखण्ड
खुंट गाँव में महिला सशक्तिकरण और आजीविका को नई दिशा, विजन 2047 को मिलेगी मजबूती।

संवादसूत्र देहरादून/अल्मोड़ा: आईआईटी रुड़की की रूटैज स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) पहल ने अल्मोड़ा जिले के खुंट गाँव में शिक्षा, आजीविका और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय की परिकल्पना पर आधारित इस पहल के तहत महिलाओं के नेतृत्व में एक लाख से अधिक शहतूत पौधों का रोपण किया गया है, जिससे रेशम उत्पादन और मूल्य-वर्धित उत्पादों के माध्यम से ग्रामीणों के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।
आईआईटी रुड़की, सेतु आयोग, नेहिर हिमालयन फ़ाउंडेशन और आरटी फ़ाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से यह पहल केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हो रही है। एकीकृत खेती मॉडल के अंतर्गत शहतूत के साथ हल्दी और अदरक जैसी फसलों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में विविधता आई है और भूमि संरक्षण को भी बल मिला है।
आरएसवीसी में विकसित उन्नत बागेश्वरी ऊन चरखा अब पैरों और विद्युत—दोनों मोड में संचालित किया जा सकता है। सौर समर्थन, बैटरी बैकअप और समायोज्य गति जैसी सुविधाओं से युक्त यह चरखा महिलाओं और कारीगरों के लिए समय बचाने, श्रम कम करने और उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में इस पहल का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। घरेलू कार्यों तक सीमित महिलाएँ अब खेती, योजना निर्माण और सामुदायिक निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इस क्रम में 17 जनवरी 2026 को खुंट गाँव में आयोजित “हरित खुलगाड़ नारी शक्ति उत्सव 2026” में महिलाओं की भागीदारी और उपलब्धियों को सम्मानित किया गया।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा कि शिक्षा और प्रौद्योगिकी का समन्वय ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखता है। वहीं सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी ने इसे पर्वतीय क्षेत्रों में सतत और समावेशी विकास का प्रभावी मॉडल बताया।
यह पहल विजन 2047 के अनुरूप आत्मनिर्भर, समावेशी और सतत ग्रामीण भारत की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में उभर रही है।




