उत्तराखण्ड
उत्तरायणी कौथिक में दिखी आत्मनिर्भर उत्तराखंड की तस्वीर।




संवादसूत्र देहरादून: सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित 4 दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत झलक पेश कर रहा है। 172 से अधिक स्टालों के माध्यम से जहां स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाज़ार मिला है, वहीं दूर-दराज़ से आए कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।
हैंडीक्राफ्ट उत्पादों की बिक्री कर रहीं नेहा कोहली ने बताया कि सेवा संकल्प फाउंडेशन ने उन्हें एक सशक्त मंच और बाज़ार उपलब्ध कराया है। परेड ग्राउंड में स्टॉल लगाने से न केवल बिक्री बढ़ी है, बल्कि उनके उत्पादों की पहचान भी बनी है। तीन दिन का अनुभव बेहद सकारात्मक रहा है।
कालसी के हरिपुर से आए पहाड़ी परिधान विक्रेता मुन्ना सिंह ने कहा कि लोगों में पारंपरिक पहाड़ी परिधानों को लेकर खासा आकर्षण देखने को मिल रहा है। महोत्सव में दूर-दूर से लोग आकर खरीदारी कर रहे हैं, जिससे उनकी आय दोगुनी हो रही है।
नरेंद्रनगर से आईं सुशीला कंडारी ने बताया कि देहरादून में कई मेले लगते हैं, लेकिन जैसा सहयोग सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा मिल रहा है, वैसा कहीं नहीं मिला। यहां उत्पादों के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी हर संभव सहायता दी जा रही है।
नैनीताल से आए रक्षित जोशी ने कहा कि इस मंच के माध्यम से उन्हें अपने उत्पादों को एक बड़ा बाज़ार मिला है। देहरादून में स्थानीय ही नहीं, बल्कि बाहर से आने वाले लोगों तक उनके उत्पाद पहुंच रहे हैं, जो गर्व की बात है।
इसके साथ ही सुरकंडा, शिव शक्ति, भाग्योदय, कुंजपुरी, आस्था सत्यम शिवम, बालाजी, लक्ष्मी, देवभूमि मां का स्वाद, सुंदरम श्याम, शुभ लक्ष्मी धनौल्टी, धरती सहित अनेक स्वयं सहायता समूहों ने आयोजन की सराहना की।
लोक संस्कृति और रंगारंग कार्यक्रमों ने मोहा मन
महोत्सव के तीसरे दिन भी उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शकों ने देवभूमि की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक गीत-संगीत और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। पूरा परिसर लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
आईटीबीपी के स्टॉल पर आधुनिक हथियारों का आकर्षण
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा लगाए गए विशेष स्टॉल में 9 एमएम एसएमजी, 84 एमएम सीजीआरएल, ए.के.-47, मशीन गन और रॉकेट लॉन्चर जैसे आधुनिक हथियारों की प्रदर्शनी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। जवानों ने आगंतुकों को इन हथियारों की विशेषताओं और देश की सुरक्षा में उनकी भूमिका की जानकारी दी। युवाओं और बच्चों में खास उत्साह देखने को मिला।
मंडुए के व्यंजनों ने खींचा स्वाद का रस
पारंपरिक व्यंजनों के स्टालों में ‘ख़ाकसार मंडुए’ के उत्पाद लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। मंडुए से बने बर्गर, डोसा, मोमोज, चाउमीन और हलवे जैसे नवाचारपूर्ण व्यंजनों को चखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। पोषण से भरपूर इन व्यंजनों ने स्वास्थ्य और स्वाद का अनूठा संगम पेश किया।
सेवा संकल्प फाउंडेशन का यह आयोजन लोक संस्कृति के संरक्षण, स्थानीय उत्पादों के प्रचार और रोजगार सृजन की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में सामने आया है।




