उत्तराखण्ड
27वीं बार उत्तराखंड आ रहे पीएम मोदी,धामी करेंगे भव्य स्वागत।

संवादसूत्र देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को अपने 27वें उत्तराखंड दौरे पर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साढ़े चार साल के कार्यकाल में यह उनका 17वां दौरा होगा। प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर प्रदेश में उत्साह का माहौल है और सरकार तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है।
प्रधानमंत्री इस दौरान दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे सहित टिहरी में 1000 मेगावाट क्षमता वाले देश के पहले वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज संयंत्र का लोकार्पण करेंगे।
मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर 2015 को ऋषिकेश से अपने उत्तराखंड दौरों की शुरुआत की थी। उन्होंने दयानंद सरस्वती आश्रम पहुंचकर स्वामी दयानंद गिरी से मुलाकात की थी।
प्रधानमंत्री की केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में गहरी आस्था रही है। वह अब तक पांच बार केदारनाथ धाम के दर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा बद्रीनाथ और मुखबा (मां गंगा का शीतकालीन प्रवास स्थल) का भी दौरा कर चुके हैं।
उनके दौरों के बाद केदारनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश और उत्तरकाशी के मुखबा क्षेत्र में भी पर्यटन को बढ़ावा मिला है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से भावनात्मक रिश्ता है। उनके नेतृत्व में राज्य को ₹2 लाख करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं की सौगात मिली है।
परियोजना, केदारनाथ एवं हेमकुंड साहिब रोपवे, देहरादून-दिल्ली एलिवेटेड रोड जैसी कई बड़ी परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
एक्सप्रेस-वे की खासियत
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे तीन राज्यों—दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड—को जोड़ेगा।
कुल लंबाई: 213 किमी
लागत: ₹11,963 करोड़
12 किमी लंबा एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
2 एलिफेंट अंडरपास, 6 एनिमल पास
डाटकाली के पास 370 मीटर लंबी सुरंग
6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर
दिल्ली से देहरादून की दूरी लगभग 2.5 घंटे में पूरी
टिहरी में बन रहा 1000 मेगावाट क्षमता का वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज संयंत्र देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है। यह टीएचडीसी द्वारा विकसित टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है और ऊर्जा उत्पादन को नई दिशा देगा।
प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में नई उपलब्धियों को गति देगा, बल्कि उत्तराखंड में पर्यटन, आस्था और विकास के नए आयाम भी स्थापित करेगा।




