उत्तराखण्ड
देहरादून में राहुल गांधी का हमला, बोले- देश में पेपर लीक का ‘मेन्यू कार्ड’ तैयार।

संवादसूत्र देहरादून: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में पेपर लीक का ऐसा “मेन्यू कार्ड” बन गया है, जिसमें हर परीक्षा का रेट तय है। उन्होंने मांग की कि भर्ती परीक्षाओं का संचालन निजी कंपनियों के बजाय सरकार स्वयं करे, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
दोपहर करीब ढाई बजे जौलीग्रांट हवाई अड्डे पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने सबसे पहले दिवंगत कांग्रेस नेता अमर मेहता के आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने एक निजी होटल में पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक की। शाम को रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों और अभ्यर्थियों से संवाद किया।
करीब एक घंटे तक चले संवाद में राहुल गांधी ने कहा कि देश में पेपर लीक एक संगठित व्यवस्था का रूप ले चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की कीमत तय है और पैसा देकर उन्हें हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे मेहनत करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
राहुल गांधी ने रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के पांच प्रमुख रास्ते हैं—विनिर्माण, उद्यमिता, कॉर्पोरेट, निजी क्षेत्र और सरकारी नौकरी। उनका आरोप था कि पहले चार क्षेत्रों में अवसर लगातार कम हुए हैं, जबकि सरकारी नौकरियों में भी पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण योग्य युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है।
कार्यक्रम के दौरान नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाली देहरादून की छात्रा रिया थापा के पिता राजेश गुरुंग ने अपनी बेटी की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि परीक्षा देकर लौटने के बाद रिया बेहद खुश थी, लेकिन पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद वह मानसिक रूप से टूट गई और बार-बार कहती थी कि “हमारे साथ धोखा हुआ है।” अपनी बात बताते हुए वह भावुक हो गए और मंच पर उनकी आंखें भर आईं।
ऑनलाइन गणित शिक्षक अभिनय शर्मा ने भी मंच से शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पेपर लीक के लिए कोई जवाबदेह नहीं है तो जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने नई शिक्षा नीति के पूर्ण क्रियान्वयन, परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रश्नों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए छात्रों से शुल्क लेने की व्यवस्था समाप्त करने की मांग की।
बारिश के बावजूद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा पहुंचे। राहुल गांधी के मंच पर पहुंचने से पहले ही पंडाल खचाखच भर गया था। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद शुरू हुए संवाद में युवाओं ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।




