आपदा
आपदा प्रबंधन में सेना-यूएसडीएमए का समन्वय होगा और मजबूत, गोल्डन ऑवर रिस्पॉन्स पर जोर।

संवादसूत्र देहरादून, 29 जुलाई: उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी, त्वरित और समन्वित बनाने के उद्देश्य से बुधवार को उत्तराखंड सब एरिया में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मानसून सहित विभिन्न आपदा परिस्थितियों में संयुक्त रणनीति, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आपसी समन्वय को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे आपदा संभावित राज्य में भारतीय सेना हमेशा एक भरोसेमंद सहयोगी रही है। उन्होंने वर्ष 2024 की केदारघाटी आपदा और वर्ष 2025 में धराली सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सेना और वायु सेना द्वारा किए गए राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार सेना के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग ब्रिगेडियर आर.एस. थापा ने कहा कि आपदा के समय मानव जीवन की रक्षा सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। उन्होंने कहा कि गोल्डन ऑवर के दौरान राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने पर विशेष जोर दिया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।
बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन ने सेना से राहत एवं बचाव में उपयोग होने वाले उपकरणों और संसाधनों का विवरण इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (आईडीआरएन) पोर्टल पर अपलोड करने का अनुरोध किया, जिससे जरूरत के समय विभिन्न एजेंसियां उनका प्रभावी उपयोग कर सकें। इसके अलावा जिलों में गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की सहभागिता बढ़ाने और पूर्व सैनिकों के अनुभव का आपदा प्रबंधन में उपयोग करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में यूएसडीएमए के एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा सहित प्राधिकरण के विशेषज्ञ मौजूद रहे।




