उत्तराखण्ड
“खामोश नहीं, खास हैं ये बच्चे”:ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर समाज को संदेश।

संवादसूत्र देहरादून: विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के अवसर पर राजधानी देहरादून में ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बच्चे भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उचित मार्गदर्शन मिलने पर जीवन में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
जिला चिकित्सालय के मनोरोग विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह लगभग 20 ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे पहुंच रहे हैं। वहीं दून मेडिकल कॉलेज में भी हर सप्ताह ऐसे मरीजों का उपचार किया जा रहा है। चिकित्सक बच्चों के इलाज के साथ-साथ उनके अभिभावकों की काउंसलिंग भी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों को बोलने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार में कठिनाई होती है। इसके लक्षण बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं, जैसे आंखों से संपर्क न करना, मुस्कुराहट में कमी या एक ही गतिविधि को बार-बार दोहराना।
डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लें। उनका कहना है कि सही दिशा, उपचार और सहयोग मिलने पर ये बच्चे भी अपनी प्रतिभा से समाज में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।




