उत्तराखण्ड
2026 की तैयारी: आत्मनिर्भर और सशक्त स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर उत्तराखंड।

संवादसूत्र देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सतत मार्गदर्शन में उत्तराखंड का चिकित्सा शिक्षा विभाग तेज़ी से परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। राज्य सरकार का स्पष्ट उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना तथा युवाओं को उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा के अवसर प्रदान करना है। इस दिशा में चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की प्रभावी प्रशासनिक भूमिका ने विभागीय सुधारों को ठोस आधार प्रदान किया है।
वर्ष 2025 चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियों का वर्ष रहा। मेडिकल कॉलेजों में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नियुक्तियाँ की गईं। इस वर्ष सात राजकीय मेडिकल कॉलेजों में स्थायी प्राचार्यों की नियुक्ति से प्रशासनिक स्थिरता आई। साथ ही 18 प्रोफेसर, 36 एसोसिएट प्रोफेसर और 142 असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन पूरा किया गया, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली नर्सिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 1248 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त सीएसएसडी/ओटी टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रगति पर है। नर्सिंग कॉलेजों में भी प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ट्यूटर की नियुक्तियाँ की गईं तथा चमोली, पौड़ी, अल्मोड़ा और हल्द्वानी में एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए।
अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में दून मेडिकल कॉलेज और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक ऑडिटोरियम का लोकार्पण किया गया। दून चिकित्सालय में चार नए इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर शुरू हुए, जिससे आपातकालीन सेवाएँ सशक्त हुईं।
विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए देहरादून और हल्द्वानी में सुपर स्पेशियलिटी विभाग स्थापित किए गए। विशेषज्ञ चिकित्सकों को आकर्षित करने के लिए वेतनमान में ऐतिहासिक वृद्धि की गई। इसके साथ ही 68 नई पीजी सीटों की स्वीकृति से भविष्य के विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में आई बैंक और कॉर्निया प्रत्यारोपण केंद्र की शुरुआत तथा दून चिकित्सालय में हाइपरबारिक ऑक्सीजन थेरेपी सुविधा ने राज्य को आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से जोड़ा है। कैंसर संस्थान, नए मेडिकल कॉलेज, छात्रावास और अस्पताल निर्माण कार्य भी तीव्र गति से प्रगति पर हैं।
वर्ष 2026 की ओर देखते हुए सरकार का लक्ष्य राज्य को आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर ले जाना है। 2030 तक प्रति हजार आबादी पर एक डॉक्टर उपलब्ध कराने, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार और अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं के माध्यम से उत्तराखंड को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में सरकार दृढ़ संकल्पित है।
चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि विभाग का लक्ष्य केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वित विकास है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।




