उत्तराखण्ड
विश्वसनीय साक्ष्य लाएं, सरकार हर जांच के लिए तैयार: सुबोध उनियाल।

संवादसूत्र देहरादून, 2 जनवरी: कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने अंकिता प्रकरण को लेकर चल रहे विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति विश्वसनीय और पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत करता है तो सरकार किसी भी स्तर की जांच के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के जांच की मांग करना न केवल न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है, बल्कि सजायाफ्ता दोषियों को कानूनी लाभ भी पहुंचा सकता है।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में सुबोध उनियाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही एसआईटी जांच को सही ठहरा चुका है और सीबीआई जांच से इनकार कर चुका है। ऐसे में केवल अपुष्ट आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने से न्याय की दिशा भटक सकती है। उन्होंने दोहराया कि यदि कोई भी व्यक्ति या पक्ष ठोस साक्ष्य के साथ सामने आता है तो सरकार न केवल जांच कराएगी, बल्कि साक्ष्य प्रस्तुत करने वालों को सुरक्षा भी प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना से पूरी देवभूमि आहत थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए धामी सरकार ने तत्काल महिला डीआईजी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया, आरोपियों की गिरफ्तारी की गई और सभी फोरेंसिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में मजबूती से पैरवी की गई। पीड़ित परिवार की सहमति से की गई प्रभावी कार्रवाई के परिणामस्वरूप दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और उन्हें जमानत तक नहीं मिल पाई।
सीबीआई जांच के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार जांच से कभी पीछे नहीं हटी है, लेकिन विश्वसनीय साक्ष्य सामने आना आवश्यक है। सोशल मीडिया पर आरोप लगाने वालों से उन्होंने अपील की कि वे सामने आकर प्रमाण प्रस्तुत करें। यदि उनमें जरा भी सच्चाई पाई जाती है तो सरकार बड़ी से बड़ी जांच कराने से भी पीछे नहीं हटेगी।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट—तीनों न्यायालयों ने एसआईटी की कार्यवाही को सही और सक्षम माना है। न्यायालयों ने यह भी स्पष्ट किया कि विवेचना के दौरान किसी वीआईपी को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया और न ही किसी वीआईपी की संलिप्तता पाई गई। इस मामले की पैरवी पीड़िता के परिजनों की इच्छा से नियुक्त विशेष अभियोजन अधिकारी द्वारा की गई थी, जिनकी ओर से भी किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई।
क्राइम सीन पर बुल्डोजर चलाने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि न्यायालय ने भी माना है कि एफएसएल टीम द्वारा साक्ष्य एकत्र करने के बाद ही तोड़फोड़ की गई थी। बावजूद इसके, एक खास नजरिया स्थापित करने के लिए इस मुद्दे को दुष्प्रचार के रूप में फैलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में वायरल हो रही रिकॉर्डिंग में न तो समय और न ही तिथि स्पष्ट है। उसमें दुखद मौत के कारण को लेकर की गई दोहरी बयानबाजी न्यायालय में अभियुक्तों को लाभ पहुंचा सकती है और उनकी जमानत का आधार बन सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि यह एक सुनियोजित प्रयास भी हो सकता है, जिससे कुछ व्यक्तियों को व्यक्तिगत क्षति पहुंचाने का उद्देश्य प्रतीत होता है।
सुबोध उनियाल ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और जब तक ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य सामने नहीं आते, तब तक किसी भी प्रकार की जल्दबाजी पूरी कानूनी प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी तथा प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन भी उपस्थित रहे।




