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मानसून आपदाओं से निपटने की तैयारियों की होगी परीक्षा, 02 जुलाई को राज्यव्यापी मॉक ड्रिल।

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मानसून आपदाओं से निपटने की तैयारियों की होगी परीक्षा, 02 जुलाई को राज्यव्यापी मॉक ड्रिल।

संवादसूत्र देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए 02 जुलाई को राज्यव्यापी मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आयोजित होने वाली इस मॉक ड्रिल में राज्य के सभी 13 जनपदों के लगभग 70 स्थानों पर एक साथ राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया जाएगा।

शुक्रवार को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में आयोजित ओरिएंटेशन एवं समन्वय बैठक में मॉक ड्रिल की तैयारियों की समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मानसून पूर्व तैयारियों को अंतिम रूप देने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए थे। इस बार अभ्यास उन नए स्थानों पर किया जाएगा जहां पहले मॉक ड्रिल नहीं हुई है।

मॉक ड्रिल से पहले 30 जून को टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी जनपद अपने संसाधनों, उनकी उपलब्धता और तैनाती सहित तैयारियों का प्रस्तुतीकरण करेंगे। पूरी प्रक्रिया घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (आईआरएस) के तहत संचालित होगी।

अभ्यास के दौरान राहत शिविरों की स्थापना कर वहां बिजली, पानी, भोजन, प्राथमिक चिकित्सा, शिशु आहार तथा गर्भवती महिलाओं के लिए सुविधाओं की व्यवस्था को वास्तविक परिस्थितियों में परखा जाएगा। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस और होमगार्ड की तैनाती भी की जाएगी।

आपदा प्रबंधन विभाग ने इस बार सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया है। मॉक ड्रिल में पूर्व सैनिकों, अर्द्धसैनिक बलों के पूर्व जवानों, आपदा मित्रों, स्वयंसेवी संगठनों, एनसीसी, एनएसएस और रेड क्रॉस के सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि आपदा के समय समुदाय आधारित प्रतिक्रिया व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

मॉक ड्रिल से पहले विभिन्न एजेंसियों द्वारा आपदा प्रबंधन उपकरणों और संसाधनों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों के आधुनिक उपकरणों, संचार प्रणालियों और बचाव संसाधनों का प्रदर्शन किया जाएगा।

अभ्यास में जलभराव, तटबंधों को खतरा, स्कूलों से बच्चों की सुरक्षित निकासी, भूस्खलन से मार्ग अवरुद्ध होने, कट-ऑफ क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने, जल विद्युत परियोजनाओं से पानी छोड़े जाने की स्थिति में अलर्ट जारी करने तथा छतों पर फंसे लोगों के हेली रेस्क्यू जैसे विभिन्न मानसून जनित आपदा परिदृश्यों पर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस अभ्यास से विभागों की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण होगा और आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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