उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड में सुशासन की नई पहचान: ‘जन-जन की सरकार’ से बदली शासन की तस्वीर।

संवादसूत्र देहरादून, 2 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार का “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जवाबदेह शासन की सशक्त मिसाल बनकर सामने आया है। यह अभियान न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव लेकर आया है, बल्कि सरकार और आम नागरिक के बीच की दूरी को भी प्रभावी रूप से समाप्त करने में सफल रहा है।
आज आयोजित कार्यक्रम की दैनिक प्रगति रिपोर्ट इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार अब कागजी योजनाओं से आगे बढ़ते हुए ज़मीनी स्तर पर ठोस और प्रत्यक्ष परिणाम दे रही है। प्रदेश के सभी 13 जनपदों में एक ही दिन में 204 जनसेवा कैम्प आयोजित किए गए, जिनमें 1 लाख 35 हजार 194 से अधिक नागरिकों ने सीधे सहभागिता की। इतनी व्यापक जनभागीदारी इस बात को दर्शाती है कि यह कार्यक्रम जनता की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा है और लोगों ने इसे पूरे भरोसे के साथ अपनाया है।
इन कैम्पों के माध्यम से पहली बार शासन-प्रशासन सीधे जनता के द्वार पहुँचा। इससे ग्रामीण, पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला या तहसील मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
कार्यक्रम के दौरान कुल 17 हजार 747 शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 12 हजार 776 मामलों का मौके पर या त्वरित कार्रवाई के माध्यम से निस्तारण किया गया। लगभग तीन-चौथाई समस्याओं का तत्काल समाधान प्रशासनिक दक्षता, निर्णय क्षमता और जवाबदेही का स्पष्ट संकेत है। शेष मामलों को भी समयबद्ध कार्ययोजना के तहत संबंधित विभागों को भेजकर नियमित निगरानी में रखा गया है।
कैम्पों में आय, जाति, निवास, सामाजिक श्रेणी सहित अन्य आवश्यक प्रमाण पत्रों से जुड़े 19 हजार 734 आवेदन प्राप्त हुए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अब नागरिकों को मूलभूत सेवाओं के लिए अनावश्यक औपचारिकताओं और विलंब का सामना नहीं करना पड़ रहा है। विशेष रूप से गरीब, वंचित और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल अत्यंत लाभकारी साबित हुई है।
इसके साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 77 हजार 203 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया गया। यह आँकड़ा इस बात का ठोस प्रमाण है कि सरकारी योजनाएँ अब घोषणाओं तक सीमित न रहकर पात्र लाभार्थियों तक वास्तविक रूप से पहुँच रही हैं। सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य योजनाओं का लाभ एक ही मंच पर उपलब्ध कराकर सरकार ने पारदर्शिता और जनसुविधा को और मजबूत किया है।
इस अभियान की सफलता के पीछे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट, सख्त और परिणामोन्मुख निर्देश अहम रहे। उन्होंने अधिकारियों को जनता को कार्यालयों में बुलाने के बजाय स्वयं फील्ड में जाकर समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। प्रत्येक कैम्प में निर्णय लेने में सक्षम अधिकारियों की उपस्थिति, प्राथमिक स्तर पर शिकायत निस्तारण, लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग और कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देने जैसे कदमों ने प्रशासन को अधिक संवेदनशील और सक्रिय बनाया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार उत्तराखण्ड में शासन की सोच को बदलने वाला अभियान है। हमारी सरकार का मानना है कि लोकतंत्र तभी सशक्त होता है जब सरकार स्वयं जनता तक पहुँचे। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विश्वास, समाधान और संवेदनशीलता पर आधारित उत्तराखण्ड मॉडल ऑफ गुड गवर्नेंस है।”
उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल प्रशासन पर जनता का विश्वास मजबूत हुआ है, बल्कि बिचौलियों और भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगा है। सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद से त्वरित समाधान की संस्कृति विकसित हुई है और शासन की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम आज उत्तराखण्ड में सुशासन की नई पहचान बन चुका है और आने वाले समय में राज्य के विकास व जनकल्याण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।




