उत्तराखण्ड
शहरी परिवहन का मेगा प्लान: ई-बीआरटीएस, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं को तेज़ी।

संवादसूत्र देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड में शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में ठोस पहल शुरू हो गई है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन की विभिन्न परियोजनाओं की मैराथन समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र की ई-बीआरटीएस, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई। निगम के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने अद्यतन प्रस्तुतीकरण दिया।
त्रिवेणी घाट–नीलकंठ रोपवे को अहम स्वीकृति
त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक एनओसी/अनुमोदन प्राप्त हो चुके हैं। स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए आवेदन भी किया जा चुका है। यह परियोजना श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के साथ पर्वतीय यातायात दबाव कम करने में सहायक होगी।
सचिव ने भविष्य की परियोजनाओं में 30 वर्ष के कंसेशन पीरियड को बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए, ताकि निजी निवेश आकर्षित किया जा सके।
हरिद्वार में इंटीग्रेटेड रोपवे और पीआरटी सिस्टम
हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना (डीडीयू पार्किंग–चंडी देवी–मनसा देवी–मल्टीमॉडल हब) की डीएफसी प्रक्रिया 18 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
हरिद्वार पीआरटी परियोजना के तहत 4 कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—
सीतापुर–भारत माता मंदिर
सिटी अस्पताल–दक्ष मंदिर
लालतारा चौक–भूपतवाला
गणेशपुरम–डीएवी पब्लिक स्कूल
कुल 21 स्टेशन और 20.73 किमी लंबाई वाली यह योजना तीर्थ सीजन में यातायात प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
देहरादून में 31.52 किमी का ई-बीआरटीएस कॉरिडोर
देहरादून में प्रस्तावित ई-बीआरटीएस परियोजना के तहत दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। पहला कॉरिडोर आईएसबीटी से रायपुर तक 31.52 किमी लंबा होगा, जिसमें 35 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
सचिव ने निगम अधिकारियों के साथ आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन तक 17 स्टेशनों का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण भी किया। प्रस्तावित आईएसबीटी स्टेशन के लिए 0.64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई, जो वर्तमान में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अधीन है। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
देहरादून पीआरटी के तीन कॉरिडोर
देहरादून में पीआरटी परियोजना के तहत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—
क्लेमेंटटाउन–बल्लूपुर चौक
पंडितवाड़ी–रेलवे स्टेशन
गांधी पार्क–आईएसबीटी पार्क
सचिव ने निर्देश दिया कि परियोजना को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल से जोड़ा जाए, जिससे सुनियोजित शहरी विस्तार सुनिश्चित हो सके।
पार्किंग पॉलिसी-2022 से समन्वय
सचिव ने उत्तराखण्ड कार पार्किंग पॉलिसी-2022 के अनुरूप सभी शहरी परिवहन परियोजनाओं में समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। उनका स्पष्ट मत था कि प्रभावी ट्रांजिट सिस्टम के लिए पार्किंग प्रबंधन अनिवार्य है।
शहरी परिवहन के नए युग की शुरुआत
डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप आधुनिक, सुरक्षित और सतत परिवहन नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। रोपवे, पीआरटी और ई-बीआरटीएस परियोजनाएं यातायात दबाव कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन संवर्धन में भी अहम भूमिका निभाएंगी।
यदि निर्धारित समयसीमा में ये परियोजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र में यातायात प्रबंधन, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। उत्तराखण्ड में शहरी परिवहन के क्षेत्र में यह पहल एक नई शुरुआत मानी जा रही है।




