ख़बर शेयर कर सपोर्ट करें

हरदेव नेगी

जब बंदिशों का हो ताना बाना,
जब दिल का दिल से हो नजराना,
तोड़कर सारी बंदिश को,
फिर भी तुम चले आना।।

क्यों तुमसे है नाता पुराना,
रोज ढूंढती तुम नया बहाना,
खाके झूठी कसमों को,
फिर भी तुम चले आना।।

ना तुम खुद को सजना संवारना,
लाली काजल सब छोड़ जाना,
भूल जाना रश्म रिवाजों को,
फिर भी तुम चले आना।।

और पढ़ें  मुनिकीरेती के समीप गंगा में डूब रहे चार युवकों को जल पुलिस ने बचाया।

राह कांटो की तुम सब सह जाना,
बैरी जमाना तुम दिल को समझाना,
कोई बातों से बहलाये तुमको,
फिर भी तुम चले आना।।

चले आना तुम रूठ न जाना,
अपनी पलकों से ये खुशी जताना,
ढूँढ रही ये आँखें तुमको,
फिर भी तुम चले आना।।

हरदेव नेगी
गुप्तकाशी (रुद्रप्रयाग)

Leave a Reply

Your email address will not be published.