उत्तराखण्ड
इटली पहुंची देहरादून की लीची, यूरोपीय बाजार में उत्तराखंड की मीठी दस्तक।

देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध लीची ने अब यूरोपीय बाजार में भी अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत कार्यरत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से देहरादून से इटली के लिए ताजी लीची की पहली निर्यात खेप रवाना की गई है। 18 जून को भेजी गई एक मीट्रिक टन लीची की यह खेप उत्तराखंड के बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
देहरादून की लीची अपनी विशेष मिठास, आकर्षक लाल रंग, सोंधी सुगंध और उत्कृष्ट गूदे की गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। राज्य में विशेष रूप से रोज़ सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी प्रीमियम किस्मों का उत्पादन होता है। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियां इन फलों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाती हैं।
इस निर्यात पहल से स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ भी मिला है। जानकारी के अनुसार, निर्यात के कारण उत्पादकों को घरेलू बाजार की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ है। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन अपनाने और निर्यात उन्मुख बागवानी की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
इस उपलब्धि के पीछे एपीडा, उत्तराखंड सरकार, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), लॉजिस्टिक्स भागीदारों और अन्य हितधारकों के संयुक्त प्रयास रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इटली को लीची का यह निर्यात भारतीय ताजे फलों के लिए नए बाजारों के द्वार खोलेगा और उत्तराखंड के बागवानी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।
एपीडा का कहना है कि वह बाजार विकास, गुणवत्ता आश्वासन, बुनियादी ढांचा सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के प्रयास लगातार जारी रखे हुए है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और भारत को प्रीमियम कृषि उत्पादों के विश्वसनीय निर्यातक के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




